क्या आपके पास अपने देश के लिये10 मिनट है? यदि हाँ, तो इसे पढिये, वर्ना आपकी इच्छा

तुम कहते हो की हमारी सरकार अयोग्य है।तुम कहते हो की हमारा कानून बहुत पुराना है।तुम कहते हो की महानगरपालिका कूड़े-कचरे को नही उठाती।तुम कहते हो की फ़ोन काम नही करता, रेल्वे एक जोक है, हमारी एयरलाइन दुनिया में सबसे ख़राब है, गाड़िया कभी अपने निर्धारित स्थान तक नही पहुचती।तुम कहते हो की हमारा देश कुत्तो से भरा हुआ है और देश में गड्डे ही गड्डे है।तुम कहते हो, कहते हो और कहते रहते हो।तुमने इसके लिये क्या किया? इस रास्ते में सिंगापुर के एक इंसान को लीजिये।सिंगापुर में आप सिगारेट को रास्तो पर नही फेंक सकते और ना ही दुकान के अंदर सिगारेट का सेवन सकते है। तुम उसी तरह उनके जमीन के अंदर के रास्तो का गर्व करोंगे जैसे वे लोग है। बगीचे वाले रास्ते पर से गाड़ी चलाने के लिये तुम्हे वहाँ 5$ देने की जरुरत होंगी, वो भी तुम 5 PM से 8 PM तक ही चला सकते हो। यदि तुम गाड़ी पार्क करना चाहो तो तुम्हे वहाँ टिकट लेनी पड़ेंगी। यदि तुम्हे किसी रेस्टोरेंट में रहना है तो वहाँ सबसे पहले तुम्हे अपनी पहचान बतानी होंगी। सिंगापुर में तुम कही भी कुछ भी नही बोल सकते। दुबई में रामदान के समय में आप सामाजिक स्थानों पर कुछ खाने की हिम्मत भी नही कर सकते। अपने सिर को जेद्दाह से ढंके बिना आप कही बाहर भी नही निकाल सकते।वाशिंगटन में तुम 55 mph से ज्यादा की स्पीड में गाड़ी नही चला सकते और ना ही ट्रैफिक पुलिस को ये कह सकते, “जानता है मै कौन हूँ?” तुम ये भी नही कह सकते की मै उसका या इसका बेटा हूँ। ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैण्ड में खाली नारियल को आप कही भी नही डाल सकते आपको उसे कचरे के डिब्बे में ही डालना होता है। टोक्यो में आप पान को कही भी नही थूंक सकते। बोस्टन में आप जाली दस्तावेज और सर्टिफिकेट बनाने की कोशिश क्यों नही करते? हम अभी भी तुम से ही बात कर रहे है। तुम अपने देश में विदेशी सिस्टम का सम्मान कर सकते हो लेकिन अपने देश में अपने ही देश के सिस्टम का सम्मान नही कर सकते। भारतीय जमीन पर कदम रखते ही तुम रास्तो पर पेपर और सिगारेट फेंकना शुरू कर देते हो। यदि विदेशो में आप विदेशो की तरह रहतो हो और उनके नियमो का पालन करते हो तो अपने ही देश में हमारे नियमो का पालन क्यों नही करते?

एक बार इंटरव्यू में बॉम्बे के प्रसिद्ध म्युनिसिपल कमिश्नर मी. तिनैकर ने कहा था की, “अमीर लोगो के कुत्ते सडको पर घूमते है और सभी जगहों पर गन्दगी कर चले जाते है।” इसके बाद उनपर बहुत से लोगो ने अपनी प्रतिक्रियाये भी व्यक्त की थी और बहुत से लोगो ने उनकी आलोचना भी की थी। अमेरिका में कुते का मलिक खुद अपने कुत्ते के गंदगी करने के बाद उसे खुद साफ़ करता है। ऐसा ही जापान में भी होता है। लेकिन क्या भारतीय नागरिक ऐसा करते है? बल्कि हम गंदगी फ़ैलाने के लिये सरकारी पोल का चुनाव करते है और फिर गंदगी के लिये उसी सरकार को दोषी ठहराते है। क्या यह हमारी जिम्मेदारी नही है? क्या हर काम सरकार का ही होता है, क्या सरकार को ही हमारे घर, आस-पास और रास्तो का कूड़ा-कचरा साफ़ करना चाहिये? क्या इसीलिए हमने उनका चुनाव किया है। हम सरकार से आशा रखते है की वह रास्तो को साफ़ रखे लेकिन उनके द्वारा बनाये कूड़ादान में हम कभी कचरा डालना पसंद नही करते। हम चाहते है की रेल्वे में हमें साफ़ बाथरूम मिले लेकिन हम रेल्वे के बाथरूम का सही उपयोग करना नही जानते।हम चाहते है की भारतीय एयरलाइन और एयर इंडिया अच्छा खाना दे लेकिन हम उनकी बदनामी करना और बद्तमीजी से बात करना नही छोड़ सकते। जब सामाजिक मुद्दों की बात की जाये विशेषतः महिलाओ से संबंधित जैसे दहेज़, कन्या भ्रूण हत्या या इत्यादि तो ऐसे मौको पर हम विशाल पोस्टर बनाते है और रास्तो पर घेराबंदी कर शोर-शराबा करते है। और सिस्टम को बदलने की मांगे करते है। लेकिन कैसा होंगा यदि हम अपने ही बेटे की शादी में दहेज़ लेने से इंकार कर दे?कौन इस सिस्टम को बदलना चाहेंगा? सिस्टम में क्या-क्या शामिल है? देखा जाये तो सिस्टम में हमारे ही पडोसी, घर के सदस्य, शहर, दुसरे समुदाय और चुनी हुई सरकार शामिल है। लेकिन जैसा की हम व्यवहार करते है उसके अनुसार सिस्टम में सब शामिल है सिवाय तुमको और मुझको छोड़कर। जब सिस्टम को बदलने के लिये सकारात्मक योगदान देने की बात आती है तो हम अपनेआप को अपने परिवार के अंदर बंद कर देते है। और चाहते है की कोई इंसान आये और कोई चमत्कार कर सबकुछ बदल जाये। जब भारत अच्छा नही लगता तो हम न्यू यॉर्क चले जाते है। जब न्यू यॉर्क असुरक्षित लगता है तो हम इंग्लैंड चले जाते है। जब इंग्लैंड में हमें बेरोजगारी दिखाई देती है तो हम गल्फ देशो में चले जाते है। और जब गल्फ में भी हमे युद्ध दिखाई देते है तो हम वापिस अपने परिवार के साथ भारत आ जाते है।आज हर कोई देश के बाहर जाकर रहना चाहता है। लेकिन् कोई भी सिस्टम को खुद होकर सुधारना नही चाहता।

--- डॉक्टर ए॰ पी॰ जे॰ अब्दुल कलाम